कृपाराम क परिवार पर राम की बड़ी कृपा छै। गाँव म वेकी गिनती एक सभ्य अर सम्पन्न परिवार का रूप म छै। परिवार म कृपा राम, वे की घरवकि लक्ष्मी, बड़ु नौनु रमेश, रमेश की घरवकि कांति, वूंक बेटी बेटा, सुनीता अर संतोष अर रमेश कु छुटु भाई सुरेश छौ। रमेश, सरकारी स्कूल मा ‘एल.टी.ग्रेड’
कृपाराम क परिवार पर राम की बड़ी कृपा छै। गाँव म वेकी गिनती एक सभ्य अर सम्पन्न परिवार का रूप म छै।
परिवार म कृपा राम, वे की घरवकि लक्ष्मी, बड़ु नौनु रमेश, रमेश की घरवकि कांति, वूंक बेटी बेटा, सुनीता अर संतोष अर रमेश कु छुटु भाई सुरेश छौ।
रमेश, सरकारी स्कूल मा ‘एल.टी.ग्रेड’ कु अध्यापक छौ। अबि कुछ दिन पैलि ही सुरेश बी फौज म भर्ती हवे गी छौ अर वेकी मांगण गंगाराम की दुसुरि बेटी कामिनी क दगड़ हवेगी छै। ब्यौ कु दिन सुरेश की छुट्रिट पर निर्भर छौ। सुरेश की चिट्ठी की इंतजारी छ।
एक दिन गाँव म ऐकी डाकिया न कृपाराम से रामा रूमी करण क बाद वूंक हाथ म लिफबु थर्मौद बोलि, “बोड़ा जी, तुम्हारे चिट्ठी च। शायद सुरेश भुला की च।” इनूं बोली लिफबु कृपाराम क हाथ में थर्म डाकिया चलिगे।
कृपा राम न झटपट लिफबु खोलि की देखि। सुरेश न ही भेजि छौ। जेठ क मैना म छुट्रिट ऑण क बारा म लिख्यूं छौ। साथ ही ब्यौ क बारा म जानकारी मंगी छौ।
उत्तराखण्ड म आज बी फौज की नौकरी लोगु कू आकर्षण च। जेठ लगद ही सुरेश अपंण ब्यौ कि पूरि तैयारी क साथ छुट्रिट ऐगे। बड़ी धूमधाम से सुरेश कु ब्यौं हवेगी। कामिनी वेकी ब्योलि बणी घर म ऐगी। वे घर म कामिनी क कदम पड़द ही व नरक बणिंगे। कामिनी न औंद ही परिवार तै कुदेरुणू उनिं शुरू कै दे जनु ग्यूं-जी तैं घृणू भितर ही भितर कुदेर दींद। झूठि सच्चि लगे की वीण सुरेश क मन म बी परिवार क प्रति अविश्वास पैदा करण म क्वी कोर कसर नि छोड़ी। कृपाराम कु जु घर कबि सुख शान्ति कू गढ़ मनेंदू छौ वख आज रात दिन गृह युद्ध क काला-भूरा बादलू कू मंडरौंणू शुरू हवेगे। अपंण पराय क भेद कू विष उगलद एक दिन कामिनी न सुरेश म स्पष्ट करद बोलि, “अरे, जौका नौन बाल दूध क गिलास छिन घटकौंणै, वीत काम कैरल। उलझन हल कैदे छै।”
अपंणि दबीं आवाज म सुरेश इतना ही बोलि सैक, “बाबा जी, अबि जरूरत यां कि जरूरत त नि छै पंणि आपकी इच्छा। सुरेश अब भौत खुश छौ। वे कि खुशी अलग हुयां कि नि छै बल्कि यांकि छै कि वे तैं ब्वे बबू क समानि यु कु प्रस्ताव नि घरंण पोड़ू।”
जे मनिखि तैं परिवार म रौंण कि आदत हूवे जौंद वु इकुलु जीवन नि बिते सकदु। भले सुरेश परिवार से अलग हवेगी पंणि वेंकु मन परिवार कू मोह नि छोड़ि सैकु।
सुरेश की पंद्रह दिन की छुट्रिट बी पूरी हवेगी। अपंण नया भितर पर तालु ठोकि आज सुरेश अर कामिनी, रुड़कि जौंण कु तैयार छा हुयां। सुरेश न क्रमानुसार अपंण माँ बाप अर भाभी तैं सेवा लगै कि विद लहे पँणि कामिनी म अपुणु यु फर्ज बि नि निभे। बिना मिल्या ही वा सुरेश क साथ रुड़कि चलिगी।
लक्ष्मी, सुरेश की माँ से हादसा तें नि सैह सैकि अर कुछ दिन बीमार रैकि बा बाद म खुद ही अपंण भरपूर परिवार से सदनिकू अलग हवेगी। माँ कि मृत्यु सूंणी रमेश घर पौंछिगे। बाल बच्चा त वेक घर पर ही रौंद छा। सुरेश अकेला एक रात कु ऐकि चलिगे कामिनी क्योंकु नि ऐ, “कुछ छुटूदु सि जवाब छा वेकु।” वीकि तबियत ठीक नी।
संस्कार कु प्रभाव अमिट हूंद। कामिनी इनी संस्कार से पीड़ित छौ। रुड़कि कु शहरी जीवन बी संस्कार वश वीतें रासनि ऐ। वींकु झगड़ालु स्वभाव नि बदलु। वा वे ढुंग्ग क समान छै जै पर धाम पांणि कू कुछ बि असर नि पड़ुदु। वींक संस्कार ही कुछ इन छा कि हर एक क दगड़ लड़नू झगड़नू, वींकि आदत बंणिगी छै। अपंण पराया, नाता रिस्तीं से वींकु क्वी लींणु दींणु नि छी।
सरकारी क्वाटर की व्यवस्था नि हूंण पर वू किराया क मकान पर ही रौंद छा। कामिनी की झगड़ालू आदत से परेशान, सुरेश न तीन क्वाटर बदलि दे छा।
एक दिन जब सुरेश शाम कु “ड्यूटी” बटि घर पौंछ त घर कुरुक्षेत्र कू मैदान छौ बंणुयूं। कामिनी अपंणि पड़ोसिन क दगड़ लड़नी। सुरेश क कानू म पड़ोसिन क ये जरूरत च। त्वे से मेरू यी बुलुंणू च कि तू वेक बच्चौं तैं पराया न समझी। वूं कि देख-भाल अपंण सि बच्चौं क समान करदि रै। वूं तै अभाव म नि रौंण दे। इनूं बोली वू अपंणि नौकरी पर चलिगे।
सुरेश अब चलण फिरण से बी परेशान छौ। द्वी नादान बच्चा, छा, वूंकि शिक्षा कि बी क्वी व्यवस्था नि छै। कामिनी क स्वभाव म अब बी क्वी खास अंतर नि ऐ छौ। यूं सबि कारणु से सुरेश भौत दुखी छी। वू अपुंण दुख सुणौंव बी त कै तै। कृपाराम कुछ करणु बि चौंदु छौ पंणि कामिनी क झगड़ालु व्यवहार क कारण वु चुप ही रै।
एक दिन कृपाराम की भेंट पुरणू दगड़या आत्माराम से हवेगी। कृपाराम कि दुख भरि व्यथा सूंणी आत्माराम न बोलि, “भुला अब कुछ बि बोलिक क्या फैदा च? हां अगर तेरु सुरेश कि रिस्ता कि भंणक मितै पैलि लग जौंदि त मीं ये रिस्ता तैं हूंण ही नि दीदुं। तुमर समधि गंगाराम क पूर परिवार से मेरि जांण पछयांण च। गंगाराम कि घरवकि कू बुर संस्कार क प्रभाव वेकि द्वी नौन्यूं पर च पुड्यूं। बड़ि नौनि ज्वा पालि बिवई वींक बी यी हाल छना। वख बि परिवार म रात दिन झगड़ै रौंद हूंणू। आत्माराम कू समर्थन करद कृपाराम न बोलि, ‘भैजि ये रिस्ता कैकि मि कखि जोग नि रै। यी बात कि मितें जरा बि जानकारी हूंदि त या नौबत ही नि औंदि।’ ‘दुध की बुद’ अर कुल कि औलाद अपुंण असर छोड़ि ही जौंद।”
















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