• दूधकि बूद

    दूधकि बूद0

    कृपाराम क परिवार पर राम की बड़ी कृपा छै। गाँव म वेकी गिनती एक सभ्य अर सम्पन्न परिवार का रूप म छै। परिवार म कृपा राम, वे की घरवकि लक्ष्मी, बड़ु नौनु रमेश, रमेश की घरवकि कांति, वूंक बेटी बेटा, सुनीता अर संतोष अर रमेश कु छुटु भाई सुरेश छौ। रमेश, सरकारी स्कूल मा ‘एल.टी.ग्रेड’

    READ MORE
  • लकीर पिटेणी

    लकीर पिटेणी0

    ‘लकीर-पिटेणी’ मात्र कहानी का ही शीर्षक नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का उद्गार भी है, जो अपने समय का महान कर्मकाण्डी और ज्योतिषी था। बात बहुत पुरानी है। तब मैं एक “मिडिल स्कूल” में अध्यापक था। वेतन में मास्टरी मिली थी। तब मैं स्कूल में ही रहता था। रहना-बसना, खाना-पीना, सब स्कूल के एक कमरे

    READ MORE
  • बसंति

    बसंति0

    आज शाम गौं म बसंति कि बरात औंणी छै, फिर बि गौंम न क्वी चहल-पहल छ अर न लोगूं म उत्साह ही दिखेंणू छौ। सोहन लाल काका अपंण भद्दाड्या कुटल न धर्मू बोड़ा मुंगरयड़ म चुल्लु जरूर छी खणंनू। कहावत च कांणि क ब्योम सौ सो जोखन। बसंति कांणि त नि छै पंणि एक आंख

    READ MORE
  • उगदु सूरज

    उगदु सूरज0

    औंसि कि कालि रात वितद ही सुबेर कु सूरज फिर उगि औंद। वैकि सुनहरि किरण, हर एक क मुख पर एक चमक अर नयु उत्साह दे जौंद। तबि सब जीव फिर अपंण-अपंण काम पर जुटि जदीं। गौंकि बिन्द्रा कू जीवन बि अब तक, कै कालि रात से कम नि रै। माँ बाबु की इकलौति संतान

    READ MORE
  • घुघुती का घोंसला

    घुघुती का घोंसला0

    अच्छी भली हंसती-खेलती गृहस्थी थी अनिल की। माँ, पत्नी, दो बच्चे- एक लड़की एक लड़का। माँ कभी उसके पास रहती, कभी बड़े बेटे के पास मुंबई और बीच-बीच में पहाड़ अपने गांव का चक्कर लगा जाती, वहाँ किसी को आधे पर खेत दिये थे, उनका हिसाब-हिताब देखने। स्वयं अनिल एवं प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता

    READ MORE
  • गूंगकि बलि

    गूंगकि बलि0

    आज पंडित ब्रह्मानंद क चौक म तिरपाल छौ तड्यूं। द्वी चार कुर्सि अर कुछ चारपायूं म दरि बिछै कि बैठक सजई छै। बैठक म कुछ लोग, जौंमु मीं बि सामिल छौ, छ्वीयूंम मस्त छा। पंडित बह्म्रानंद क घर म आज देवि पाठ कु समापन छौ। पंडित सदानंद जी, पिछला पांच दिन बटी पाठ मा छा

    READ MORE