
कृपाराम क परिवार पर राम की बड़ी कृपा छै। गाँव म वेकी गिनती एक सभ्य अर सम्पन्न परिवार का रूप म छै। परिवार म कृपा राम, वे की घरवकि लक्ष्मी, बड़ु नौनु रमेश, रमेश की घरवकि कांति, वूंक बेटी बेटा, सुनीता अर संतोष अर रमेश कु छुटु भाई सुरेश छौ। रमेश, सरकारी स्कूल मा ‘एल.टी.ग्रेड’
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‘लकीर-पिटेणी’ मात्र कहानी का ही शीर्षक नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का उद्गार भी है, जो अपने समय का महान कर्मकाण्डी और ज्योतिषी था। बात बहुत पुरानी है। तब मैं एक “मिडिल स्कूल” में अध्यापक था। वेतन में मास्टरी मिली थी। तब मैं स्कूल में ही रहता था। रहना-बसना, खाना-पीना, सब स्कूल के एक कमरे
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आज शाम गौं म बसंति कि बरात औंणी छै, फिर बि गौंम न क्वी चहल-पहल छ अर न लोगूं म उत्साह ही दिखेंणू छौ। सोहन लाल काका अपंण भद्दाड्या कुटल न धर्मू बोड़ा मुंगरयड़ म चुल्लु जरूर छी खणंनू। कहावत च कांणि क ब्योम सौ सो जोखन। बसंति कांणि त नि छै पंणि एक आंख
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