युवाे मे बढत़ी नशे की लत, गम्भीर चिन्तन का बिषय
- संपादकीय
- September 1, 2026

राष्टंपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और बिना ग्राम्य विकास के समृद्ध भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। इसीलिए उन्होंने पंचायती राज के माध्यम से ग्राम्य विकास की परिकल्पना की थी और उनके विचारों का सम्मान करते हुए हमारे संविधान-निर्माताओं ने पंचायती राज का प्रावधान किया। ग्रामीण
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आजादी के बाद भारत में राजनैतिक दलों, क्षेत्रीय दलों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई। लेकिन गुलामी के दिनों में देश के कोने-कोने में राष्ट्रीय विचार धारा का प्रवाह था, गली-कूचों में भी देश प्रेम की बयार एवं सामाजिक पुनर्जागरण की स्वर लहरियां गीत गाया करती थी और तब
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राज्य निर्माण के दो दशक पश्चात भी राज्य मे सरकार द्वारा सरं क्षित किये गये क्षेत्र में रहने वाले नागरिकाे की पीड़ा का कहीं अन्त नहीं दिखाई दे रहा है। ससाधनों के विकास के नाम पर पहाड़ के ताबडत़ोड़ दोहन सेे राष्टीय एवं विश्व-स्तर पर इस चिन्तन के लिए एक मंच तैयार होता नजर आ
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माना कि जीवन जटिल रहस्यों की गुत्थी है, कभी कठिन तो कभी सरल, लेकिन कल्पना मात्र के लिए इसे दूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए क्या अब किसी भी युवा में परित्याग करने की हिम्मत नहीं रह गयी हैै जो कि वह निरन्तर नशे की गिरफ्त में समाती जा रही है। आज जिस तरह
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जिस प्रकार कोई भी जीव पानी व हवा के बगैर जीवित नहीं रह सकता, उसी प्रकार मानव जीवन में योग्य डॉक्टर व सही दवाइयों की भी अहम भूमिका होती है। लेकिन भौतिकवाद के इस युग में अधिक से अधिक कमाने की होड़ ने इन दोनों को भी अपने वशीभूत कर लिया है और आजकल मेडिकल
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काम, क्रोध और लोभ को मनुष्य के विनाश का प्रमुख कारण माना जाता है और कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन तीनों पर विजय प्राप्त कर लेता है वह देवताओं की श्रेणी में गिना जाता है। लेकिन आज के इस युग में तो इन तीनों का ही बोलबाला है। बड़े अचरज व दुःख की
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