साधन व साध्य के बहे तर तालमले से ही विकास की धारा जनाने मखुी होगी
- संपादकीय
- September 10, 2026

इन दिनों देश व राज्यों में चुनाव का समय आता है तब-तब सभी के मन-मस्तिष्क में एक ही विचार कौंधता है, क्या इस बार राजनीतिक पार्टियां स्वच्छ छवि के नेताओं को पार्टी का टिकट देंगी? लेकिन अफसोस भ्रष्टाचार और राजनीति के अपराधीकरण के चलते वर्तमान राजनीति अपने मूल उद्देश्यों से हटकर अपराध के मकड़जाल में
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उत्तराखण्ड में जहाँ आजकल मानसून ने मार्गों की हालत खराब करके रखी हुई है तो कहीं दूसरी ओर यहाँ के अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य ने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करके रखा हुआ है। अर्थात यदि हम पूर्ण ईमानदारी व निष्ठा से यहाँ पर्यटन की संस्कृति को विकसित करें तो वह हमारे आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा
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आजादी के बाद भारत में राजनैतिक दलों, क्षेत्रीय दलों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई। लेकिन गुलामी के दिनों में देश के कोने-कोने में राष्ट्रीय विचार धारा का प्रवाह था, गली-कूचों में भी देश प्रेम की बयार एवं सामाजिक पुनर्जागरण की स्वर लहरियां गीत गाया करती थी और तब
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राष्टंपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और बिना ग्राम्य विकास के समृद्ध भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। इसीलिए उन्होंने पंचायती राज के माध्यम से ग्राम्य विकास की परिकल्पना की थी और उनके विचारों का सम्मान करते हुए हमारे संविधान-निर्माताओं ने पंचायती राज का प्रावधान किया। ग्रामीण
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राज्य निर्माण के दो दशक पश्चात भी राज्य मे सरकार द्वारा सरं क्षित किये गये क्षेत्र में रहने वाले नागरिकाे की पीड़ा का कहीं अन्त नहीं दिखाई दे रहा है। ससाधनों के विकास के नाम पर पहाड़ के ताबडत़ोड़ दोहन सेे राष्टीय एवं विश्व-स्तर पर इस चिन्तन के लिए एक मंच तैयार होता नजर आ
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