पत्थर से उपजा उसका बचपन विकटता को चीर पल्लवित हुआ जिसका यौवन, यौवन जो बिता न पाया अपने पल, अधेड़ हुआ मन पत्थर से उपजा उसका बचपन जिजीविषा की धूप से जीवन बसंत का पुष्प डाल पर ही मुरझाया, अदृश्य रूप में हुआ पतझड़ का आगमन पत्थर से उपजा उसका बचपन दिशा विहीन व्यवस्था की
पत्थर से उपजा उसका बचपन
विकटता को चीर पल्लवित हुआ जिसका यौवन,
यौवन जो बिता न पाया अपने पल, अधेड़ हुआ मन
पत्थर से उपजा उसका बचपन
जिजीविषा की धूप से जीवन बसंत का पुष्प
डाल पर ही मुरझाया,
अदृश्य रूप में हुआ पतझड़ का आगमन
पत्थर से उपजा उसका बचपन
दिशा विहीन व्यवस्था की यही है परिणति
जीवन-चक्र के झंझावतों से
इच्छाओं का किया दमन
पत्थर से उपजा उसका बचपन
राख में उगा पौधा जमा न सका धरा पर जड़ें अपनी
राख में ही झाड़ अपने बीज को
लुप्त हुआ जर्जर तन
पत्थर से उपजा उसका बचपन
कब तलक चलता रहेगा यूँ ही, यह सिलसिला
अब किसी न किसी को
बदलना होगा यह चलन
पत्थर से उपजा उसका बचपन
















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