पढ़ना-लिखना डिग्री डिप्लोमा सब कुछ है बेकार।कभी न दे पायेगा भैया ये तुझे रोजगार।। जूते चप्पल तो क्या एड़ियाँ भी घिस जायेगी।धोती-कुरता पैंट क्या लंगोट तक बिक जायेगी।। पीएचडी डिग्री घर में लटकती रह जायेगी।पर भैया कभी नौकरी तुझको न मिल पायेगी।। भरी जवानी में ही तू सड़िया जायेगा।।उमर बीस होगी तो भी साठ नजर
पढ़ना-लिखना डिग्री डिप्लोमा सब कुछ है बेकार।
कभी न दे पायेगा भैया ये तुझे रोजगार।।
जूते चप्पल तो क्या एड़ियाँ भी घिस जायेगी।
धोती-कुरता पैंट क्या लंगोट तक बिक जायेगी।।
पीएचडी डिग्री घर में लटकती रह जायेगी।
पर भैया कभी नौकरी तुझको न मिल पायेगी।।
भरी जवानी में ही तू सड़िया जायेगा।।
उमर बीस होगी तो भी साठ नजर आयेगा।।
अगर चोरी डकैती में तू सिद्धहस्त कर ले।
कुछ रोज चमबल के बीहड़ों की जो गश्त कर ले।।
फिर एमएलए क्या एम.पी. तक बन जायेगा।
मिनिस्टर क्या प्राइममिनिस्टर भी बन जायेगा।
भूख गरीबी हवाले-हवाले हो जायेगी।
झूटकों में लक्ष्मी दोस्ती चली आयेगी।
लाखों-करोड़ों क्या खरबों में खेल जायेगा।
आने वाली नस्लें भी तारता चला जायेगा।।
देश-विदेश भ्रष्टाचारी डंका बजता जायेगा।
स्विस बैंकों खाते ही खाते खोलता जायेगा।।
घोटाले-घाटाले कर ऊँचा बढ़ता जायेगा।
हर मंत्रालयों के स्वाद चखता चला जायेगा।।
जनता आरती तेरी उतारने चली आयेगी।
खून चुसाने गर्दन सांपती चली जायेगी।।
सुन्दरियों से घिरा जब झूठे जाम टकरायेगा।
अस्सी का होगा तो भी तीस नजर आयेगा।।
कालेज चेहरे होगी पर कुत्ता न दागदार नजर आयेगा।
कालीघे जितनी लगेगी कुत्ता उजला-उजला होता जायेगा।।
जितना भ्रष्ट होगा कुत्ता लम्बा-लम्बा होता चला जायेगा।
मर गया तो रो देगा भारत ओं तिरंगा झुकता चला जायेगा।।
चौराहे-चौराहे बुतों से पटते चले जायेंगे।
गली-गलियों तेरे नाम से खुलते चले जायेंगे।।
हर वर्ष हम जन्म-मरण दिन पूजते चले जायेंगे।
हार डाल बुतों को फूलों से ढकते चले जायेंगे।।
कोर्स में नये-नये चैप्टर सजते चले जायेंगे।
स्वर्ण अक्षरों में नाम तेरा लिखते चले जायेंगे।।
















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