• शैल-शिशु

    शैल-शिशु0

    पत्थर से उपजा उसका बचपन विकटता को चीर पल्लवित हुआ जिसका यौवन, यौवन जो बिता न पाया अपने पल, अधेड़ हुआ मन पत्थर से उपजा उसका बचपन जिजीविषा की धूप से जीवन बसंत का पुष्प डाल पर ही मुरझाया, अदृश्य रूप में हुआ पतझड़ का आगमन पत्थर से उपजा उसका बचपन दिशा विहीन व्यवस्था की

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