हम नहीं सुधरेंगे
- व्यंग्य
- August 17, 2026

मनुष्य की आयु बढ़ने के साथ-साथ शरीर के ऊतक कमजोर पड़ने लगते हैं, शरीर के विभिन्न जोड़ खिसने लगते हैं ऐसी स्थिति में जोड़ों में दर्द रहता है। भोजन के प्रति अरुचि हो जाती है। प्यास अधिक लगती है। घुटनों में सूजन हो जाती है। रोग बढ़ते जाने पर रोगी को चलते फिरते समय भयंकर
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आज के इस यान्त्रिकी युग में जहां मनुष्य श्रम से कतराने लगा है तथा नियम संयम की सीमाओं का अतिक्रमण करने लगा है एवं विलासिता के गर्त में काफी डूब चुका है वहीं उपरोक्त रोग मधुमेह, जिसे आधुनिक चिकित्सा शास्त्री क्पइमजमे डमससपजने नामक रोग से पुकारते है, अत्यधिक मात्रा में भारत में भी पाया जाने
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हमारे शरीर में स्थित मुट्ठी के आकार का हृदय एक मिनट में 70 से 75 बार धड़कता है और एक घंटे में लगभग 300 लीटर रक्त शरीर के अंग-प्रत्यंग में रक्त की आपूर्ति करता है। जब रक्त प्रवाह में रुकावट आती है तो इसके कारण कुछ मांसपेशियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे तीव्र वेदना होती
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धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष इस पुरुषार्थ चतुष्ठय की सिद्धि के लिए सर्वप्रथम शरीर का स्वस्थ एवं निरोग रहना नितान्त आवश्यक है। रोगों से आक्रान्त शरीर के द्वारा कोई भी पुरुषार्थ सिद्ध नहीं किया जा सकता यह सर्वथा सत्य है। अभिप्राय यह है कि स्वस्थ शरीर के द्वारा ही धर्म-कर्मों का अनुष्ठान किया जा सकता
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मानव जन्म हीरे-सा अनमोल है, जिसे स्थायी व्यक्ति भौतिक प्रगति की सीढ़ियाँ चढ़ने में व्यर्थ गंवाता है। इसे तलाश कर चमकाने का काम गुरु ही कर सकता है। ऐसे ही नहीं संत कबीर गुरु को भी गोविन्द से बड़ा बताये गये हैं। ईश्वर की कृपा से आज हमारे भाग्य में गुरु रूपी धरोहर मिलते हैं।
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अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते-भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी तरह इस घर से उस घर में जाकर गृहस्वामिनी से पूजे जाते। फिर हलवा-पूरी की दावतें उड़ाते और दक्षिणा के पैसे बार-बार गिनकर प्रसन्न होते, पर हम तो गिनती में बहुत होती
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