• हमारे महान संत गुरु0

    मानव जन्म हीरे-सा अनमोल है, जिसे स्थायी व्यक्ति भौतिक प्रगति की सीढ़ियाँ चढ़ने में व्यर्थ गंवाता है। इसे तलाश कर चमकाने का काम गुरु ही कर सकता है। ऐसे ही नहीं संत कबीर गुरु को भी गोविन्द से बड़ा बताये गये हैं। ईश्वर की कृपा से आज हमारे भाग्य में गुरु रूपी धरोहर मिलते हैं।

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  • कन्या-धन0

    अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते-भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी तरह इस घर से उस घर में जाकर गृहस्वामिनी से पूजे जाते। फिर हलवा-पूरी की दावतें उड़ाते और दक्षिणा के पैसे बार-बार गिनकर प्रसन्न होते, पर हम तो गिनती में बहुत होती

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  • हम नहीं सुधरेंगे0

    सरकार नई नेता नये, उनके सचिव सहयोगी सब नये। काम के तरीके और सिद्धान्त भी नये। पर हम तो वही हैं। हाथ पर हाथ रख अलसाने वाले, हर तमाशे को उचक-उचक कर देखने वाले, इधर- उधर भरपूर गपियाने और अपनी हर समस्या पर सरकार को कोसने वाले। हम वो हैं जो रात के अंधरे में

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  • एक मुकदमा और सही0

    ओ भारत के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों …. उठो जागो और दौड़ो। दौड़ौ अपना-अपना अस्तित्व बचाने के लिये। कुछ देशद्रोही टाइप के लोग देशभक्त का चोला ओढ़ेआप सबकी नैया बीच भंवर में डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। वे बहुत चालाक हैं। उनकी आंख जनता की आंखों पर रहती है, जो कि सदा दूरदर्शन

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  • दो राजधानियों का ऐश्वर्य0

    कितने भाग्यशाली हैं हम कि हमारे नये-नये राज्य में दो राजधानियां झेलने की सामर्थ्य है। अंग्रेजों ने हमें इतनी सारी अच्छी-अच्छी बातें सिखाई तो दो अलग-अलग राजधानियों का प्रशिक्षण भी हमें लेना ही चाहिये था। सो हमारे माई बापों ने उनका अनुसरण कर ही लिया। परिणाम स्वरूप हम सब दो राजधानियों का सुख लेने वाले

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