• कैंसर और होम्योपैथी0

    कैंसर क्या है- कैंसर शरीर के उस ग्रोथ को कहते हैं जिसकी वद्धि नियम के विरुद्ध होती है, जिसका कोई लाभदायक प्रयोजन नहीं होता। यह स्लउचींजपब टमेेमस को प्रभावित कर शरीर के अन्य स्थानों पर इसी प्रकार की ग्रोथ पैदा कर शरीर को क्षतिग्रस्त कर डालते हैं। किसी सेल ;ब्मससद्ध की अनावश्यक वद्धि को Tumour

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  • गठिया0

    मनुष्य की आयु बढ़ने के साथ-साथ शरीर के ऊतक कमजोर पड़ने लगते हैं, शरीर के विभिन्न जोड़ खिसने लगते हैं ऐसी स्थिति में जोड़ों में दर्द रहता है। भोजन के प्रति अरुचि हो जाती है। प्यास अधिक लगती है। घुटनों में सूजन हो जाती है। रोग बढ़ते जाने पर रोगी को चलते फिरते समय भयंकर

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  • मधुमेह (Dibetes Mellitus)0

    आज के इस यान्त्रिकी युग में जहां मनुष्य श्रम से कतराने लगा है तथा नियम संयम की सीमाओं का अतिक्रमण करने लगा है एवं विलासिता के गर्त में काफी डूब चुका है वहीं उपरोक्त रोग मधुमेह, जिसे आधुनिक चिकित्सा शास्त्री क्पइमजमे डमससपजने नामक रोग से पुकारते है, अत्यधिक मात्रा में भारत में भी पाया जाने

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  • हदय रोग0

    हमारे शरीर में स्थित मुट्ठी के आकार का हृदय एक मिनट में 70 से 75 बार धड़कता है और एक घंटे में लगभग 300 लीटर रक्त शरीर के अंग-प्रत्यंग में रक्त की आपूर्ति करता है। जब रक्त प्रवाह में रुकावट आती है तो इसके कारण कुछ मांसपेशियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे तीव्र वेदना होती

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  • उच्च रक्तचाप में आयुर्वेदिक उपचार0

    धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष इस पुरुषार्थ चतुष्ठय की सिद्धि के लिए सर्वप्रथम शरीर का स्वस्थ एवं निरोग रहना नितान्त आवश्यक है। रोगों से आक्रान्त शरीर के द्वारा कोई भी पुरुषार्थ सिद्ध नहीं किया जा सकता यह सर्वथा सत्य है। अभिप्राय यह है कि स्वस्थ शरीर के द्वारा ही धर्म-कर्मों का अनुष्ठान किया जा सकता

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