रूपकुंड में सिमटा है एक रहस्यमय इतिहास
- उत्तराखंड दर्पण
- August 19, 2026
हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छांह।एक पुरुष भीगे नयनों से,देख रहा था प्रलय प्रवाह।। (कामायनी) उपर्युक्त काव्य धारा के कल्पनाजनित विश्वास के संदर्भ में यदि भूगर्भ-शास्त्रियों द्वारा किये गये वर्तमान अनुसंधान एवं अति प्राचीन पौराणिक आख्यानों का गहन अध्ययन किया जाय तो स्पष्ट हो जायेगा कि महाप्रलय के बाद नूतन सृष्टि
READ MOREनगाधिराज हिमालय की गोद में बसा गढ़वाल उत्तराखण्ड आदिकाल से ही ऋषि-मुनियों एवं संत महात्माओं की तपस्थली रही है।कालान्तर में इन तपस्थलियों ने अनेक महत्वपूर्ण तीर्थों एवं देवस्थलों का स्वरूप धारण कर लिया, जिनमें बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री,तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, त्रियुगीनारायण, हेमकुण्ड (लोकपाल) आदि विशेष वन्दनीय हैं। गढ़वाल हिमालय का लगभग 20 लाख आबादी वालायह
READ MOREमहाभारत में देवलोक अथवा देवभूमि का क्षेत्र, वहां से बताया गया है, जहां से पतित पावनी गंगा प्रारम्भ में अलकनन्दा के नाम से प्रचलित हैं। केदारखण्ड के अंतर्गत गढ़वाल भू-भाग में “पंचबदरी” की भांति “पंचप्रयाग” आज भी धर्मपरायण एवं श्रद्धालु जनमानस के लिए सुप्रसिद्ध एवं सुपरिचित हैं। गढ़वाल के बदरीनाथ मार्ग पर ये पंचप्रयाग हैं
READ MOREप्राचीन समय में हिमालय के इन तीर्थ स्थानों की यात्रा इतनी कठिन एवं कष्टप्रद होती थी कि शायद कम ही व्यक्ति इन तीर्थोंकी यात्रा से सकुशल लौट आते हों। उस समय की कठिनाईयों एवं कष्टों का अनुभव आज के द्रुतगामी यातायात के साधनों के युगमें लगाना कठिन है। शास्त्रों में देवात्मा-हिमालय को पांच खण्डों में
READ MOREगढ़वाल हिमालय के अंतर्गत अनेक सुरम्य ऐतिहासिक स्थल हैं जिनकी जितनी खोज की जाय उतने ही रहस्य सामने आजाते हैं। इन आकर्षक एवं मनमोहक स्थलों को देखने के लिये प्राचीनकाल से ही वैज्ञानिक, इतिहास एवं पुरातत्ववेत्ताओं, भूगर्भ विशेषज्ञोंएवं जिज्ञासु पर्यटकों के कदम इन स्थानों में पड़ते रहे हैं। यहां उच्च हिमालय क्षेत्र के अंतर्गत अनेक
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