साहस अधिकार पराक्रम का प्रतीक ग्रह मंगल
- ज्योतिष
- August 19, 2026
सिन्धुदेशोद्भव आंगिरस गोत्रोत्पन्न भगवन गुरु-महर्षि कद्रू की तृतीय पुत्री श्रद्धा देवी का पुत्र है। इनके पितृवर महर्षि अंगिरा जी हैं। इनका जन्म वृहस्पति है। महानकाय होने के कारण और महान ज्ञानी होने से इन्हें लोग गुरु कहलाने लग गए। गुरु शब्द की व्युत्पत्ति का रहस्य है, गु + रु (अज्ञान + नाशक)। ये देवमंत्री हैं,
READ MOREगंभीरता, विवेकशक्ति का प्रतीक ग्रह बुध, देवगुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारादेवी का पुत्र है। चन्द्र व तारा के संयोग के फलस्वरूप जारज रूप में बुध की उत्पत्ति हुई। अतः चन्द्र, बुध का जनक है। वैवस्वत मनु के दस पुत्रों के बीच एकमात्र कन्या ‘इला’ बुध की भार्या है और पुरूरवा बुध का एकमात्र पुत्र है।
READ MOREयमुनातीरोद्भव आत्रेय गोत्र सोम (चन्द्र) महर्षि अत्रि और साध्वी अनुसूया देवी की तृतीय संतति हैं। एक समय त्रिदेवों (विष्णु, शिव और ब्रह्मा) ने साध्वी अनुसूया की कोख से महर्षि अत्रि के घर पुत्रों के रूप में अवतार लेने का वचन दिया था। इसी वचनबद्धता के कारण तीनों ने जन्म धारण किया। विष्णु ने दत्तात्रेय के
READ MOREमंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल है। एक बार मंगल की मातोस्वरी पृथ्वी, भगवान विष्णु पर सुप्त हो गई थी और लावण्यवती तरुणी का रूप धारण करके विष्णु के गले उपस्थित हुई। विष्णु ने उसका श्रृंगार किया, किन्तु तब वह मातोस्वरी पृथ्वी कामातुर होकर बेहोश हो गई थी, ऐसी विषम स्थिति
READ MORE‘प्रत्यक्ष देवता सूर्यः जगच्चक्षुः दिवाकरः’सूर्य-ब्रह्माण्ड गोलक का अधिपति है। पृथ्वी का सौरमण्डल सूर्य द्वारा ही संचालित व नियंत्रित है। जितने भी ग्रह, नक्षत्र, योग, राशियां, करण, आदित्यगण, वसुगण, रुद्र, अश्विनी कुमार, वायु, अग्नि, शक्र प्रजापति, समस्त भूः भुवः स्वः आदि लोक सम्पूर्ण नभ, नाग, नदियां, समुद्र और समस्त भूतों का समुदाय हैं। इन सभी के
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