बद्री-केदार की पौराणिक मान्यतायें
- उत्तराखंड दर्पण
- August 19, 2026

लक्ष्मीदत्त नौटियाल , भिवाड़ी (राजस्थान)जात-पात में मत पड़ो, वर्ण भेद भेद दो,मनुष्य मात्र एक हो, न किसी में कोई भेद हो।जाति-धर्म भिन्न-भिन्न खान-पान भिन्न-भिन्न।भिन्नता में एकता, हो कर्म में भारतीयता।राम-रहीम एक हैं, स्वरूप उनका एक हैधर्म भले ही भिन्न हो, हो कर्म में भारतीयता।चाहे राम को भजो, या रहीम से करो दुआ,इबादत का तौर भिन्न,
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अनपढ़ गंवार थे वो सन्त कबीराजो कहे माया बड़ी ठगनि हम जानीदौलत तेरी बस एक लंगोटी अरे फकीरा,देखा तूने बन्द कमरों में हीरे मोतियों का जखीरा,देखी तूने कभी बेशकीमती बी.एम.डब्लू गाड़ी,जिसमें शान से बैठे हों धनपति राजा कलमाड़ी,झूठ, फरेब, ठगी से इतनी माया जोड़ी,शपथ बद्धता हमने कब तोड़ी,शपथ तो हमनें यह थी खाई,वक्त मिला है
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