दे दो छूट जवानों को तुम, कारगिल के मस्तानों को। देश के इन दीवानों को, दुश्मन का नाम मिटाने को।। अब न सहेंगे अब न रुकेंगे, तुम भी रोक न लेना अब। रोज-रोज के जुल्म-सितम और, खतरे नहीं सहेंगे अब।। हानि उठा ली हद से ज्यादा, दुश्मन की करतूतों से। आज मिटा दो हस्ती उसकी,
दे दो छूट जवानों को तुम, कारगिल के मस्तानों को।
देश के इन दीवानों को, दुश्मन का नाम मिटाने को।।
अब न सहेंगे अब न रुकेंगे, तुम भी रोक न लेना अब।
रोज-रोज के जुल्म-सितम और, खतरे नहीं सहेंगे अब।।
हानि उठा ली हद से ज्यादा, दुश्मन की करतूतों से।
आज मिटा दो हस्ती उसकी, दे दो मुक्ति दरिंदों से।।
हश्र शान्ति का देख चुके हैं, रौद्र रूप दिखला दो अब।
जितना दर्द दिया दुश्मन ने, उसका सूद चुका दो अब।।
आज समय है सुखी बना दो, भारत की सन्तानों को।
काट फेंक दो हाथ उठे जो, कश्मीर हथियाने को।।
अब मत झुकना झुके थे जैसे, खून बहाकर वीरों का।
मिट गए देश की खातिर जो, हम मान रखें उन वीरों का।।
कब तक पृथ्वी राज बनोगे, क्षमा दान अपना कर।
गोरी उसको बना रहे क्यों, फिर इतिहास भुलाकर।।
निर्भय आज बना दो भारत, निष्कंटक कर दो राहें।
खेल सके ना खेल कभी फिर, तोड़ दो सब बाधाएं।।
अमर सपूतों को भिजवाना, देश के जन-जन का पैगाम।
जिसकी खातिर बिछड़ गए तुम, पूर्ण कर दिया है वह काम।।
इसलिए कहता हूं तुमसे, दे-दे छूट जवानों को।
देश के इन दीवानों को, दुश्मन का नाम मिटाने को।।
















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