कैंसर और होम्योपैथी
- स्वास्थ्य/चिकित्सा
- August 20, 2026

हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छांह।एक पुरुष भीगे नयनों से,देख रहा था प्रलय प्रवाह।। (कामायनी) उपर्युक्त काव्य धारा के कल्पनाजनित विश्वास के संदर्भ में यदि भूगर्भ-शास्त्रियों द्वारा किये गये वर्तमान अनुसंधान एवं अति प्राचीन पौराणिक आख्यानों का गहन अध्ययन किया जाय तो स्पष्ट हो जायेगा कि महाप्रलय के बाद नूतन सृष्टि
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