
आज शाम गौं म बसंति कि बरात औंणी छै, फिर बि गौंम न क्वी चहल-पहल छ अर न लोगूं म उत्साह ही दिखेंणू छौ। सोहन लाल काका अपंण भद्दाड्या कुटल न धर्मू बोड़ा मुंगरयड़ म चुल्लु जरूर छी खणंनू। कहावत च कांणि क ब्योम सौ सो जोखन। बसंति कांणि त नि छै पंणि एक आंख
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