सामग्री- विधि- पोषक मूल्य- बाड़ी में निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं।

सामग्री-
- मंडुवे का आटा – 150 ग्रा0
- नमक – 1/4 चम्मच
- पानी – 2 कप
विधि-
- सर्वप्रथम किसी बर्तन में पानी खौला लिया जाता है।
- खौलते पानी में मंडुवे के आटे को डालते हुए तेजी से मिलाते हैं। ताकि उसमें गांठ ना पड़े। यदि इसे लगातार नहीं हिलाया जाता है तो इसमें गांठ पड़ने की संभावना बढ जाती है।
- इसे फांणू के साथ व हरी चटनी या भांग की चटनी के साथ खाया जाता है।
- इस व्यंजन का अपना कोई स्वाद नहीं होता है। इस कारण इसे अन्य दाल या साग के साथ खाया जाता है। ‘इस व्यंजन की एक खास बात यह है कि इसे चबाकर नहीं खाया जाता है अन्यथा यह दांतों से चिपक जाता है। इसे खाने के लिए इसके छोटे छोटे गोले बनाकर फांणू में डुबोके निगल कर खाये जाते हैं।
पोषक मूल्य- बाड़ी में निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं।
- कैल्शियम- बाड़ी में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इस कारण वर्तमान में जापान ने उत्तराखण्ड सरकार से ढ़ाई सौ कुन्तल मंडुवे की मांग की है जिसका प्रयोग मंडुवा बेबी फूड्स बनाने में किया जाएगा। वर्तमान में सरकार ने जापानी विशेषज्ञों के सहयोग से मंडुवे द्वारा बेबी फूड्स बनाने की तैयारी की है, इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी, मंडुवे में कैल्शियम की अधिकता होती है इस कारण यदि इसे उपयुक्त बाजार मिल जाता है तो ग्रामीण महिलाएं इसका उपयोग नकदी फसल के रूप में कर सकती है इससे मंडुवे की खेती से प्रोत्साहन मिलेगा।
- आयरन- इसमें आयरन की भी पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।
- कार्बोहाइड्रेट- मंडुवे में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।
- वसा- बाड़ी को मुख्य रुप से दाल के साथ खाया जाता है। इस कारण पौष्टिकता और अधिक बढ़ जाती है।
- रफेज- इस व्यंजन को मुख्य रुप से मंडुवे से बनाया जाता है जिसमें चोकर होने के कारण रफेज की मात्रा बढ़ जाती है।
- विटामिन- मंडुवे व दालों में भी विटामिन पाया जाता है।
- जल- हमारे शरीर में पानी का कुछ अंश बाड़ी से भी जाता है क्योंकि दाल के साथ प्रयोग करने से आवश्यक रूप में शरीर में पानी की
मात्रा भी जाती है।










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