• बसंति

    बसंति0

    आज शाम गौं म बसंति कि बरात औंणी छै, फिर बि गौंम न क्वी चहल-पहल छ अर न लोगूं म उत्साह ही दिखेंणू छौ। सोहन लाल काका अपंण भद्दाड्या कुटल न धर्मू बोड़ा मुंगरयड़ म चुल्लु जरूर छी खणंनू। कहावत च कांणि क ब्योम सौ सो जोखन। बसंति कांणि त नि छै पंणि एक आंख

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  • अपणुखून – गढ़वालीकहानी

    अपणुखून – गढ़वालीकहानी0

    गौं कु हरि सिंह कति दिन से बीमार छौ। आज वेकि हालत कुछ जादा ही खराब छै। कुछ लोगु क नजर म त वू कुछ ही घड़ि कू मेहमान छौ। हरि सिंह वूं मनिख्यूं म गंणे जौद छौ, जौं से भाग्यविधाता सदनि कु रुठीं रै। द्वी ब्यौ करण पर बि वेतैं पारिवारिक सुख की प्राप्ति

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