• महंगै अर माभारत

    महंगै अर माभारत0

    महंगी एक इन्नु शब्द च जैकु असर शब्दभेदी बाण से बी ज्यादा च, म्यार ख्याल से त महंगी अर गरीबी कू साख्यूं कु बैर च। क्या पता महंगी अर गरीबी कू जलम जलामांतर कू प्रेम ह्वा या ह्वेय सकद वूंन्कि सौं करार करीं हो। खैर जू बी ह्वा यक्खम म्यारु मकसद आज अचाणचक्क से महंगी

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