एक लड़की की लिखी कविता
- कविता/ग़ज़ल
- August 31, 2026

अपनी सरकारों की चुस्त कार्यप्रणाली को देख कर एक विज्ञापन की याद आ जाती है, जिसमें बिस्किट के स्वाद में तल्लीन एक कम्पनी मालिक के पास भागा-भागा कोई व्यक्ति आकर सूचना देता है कि ‘फैक्ट्री में आग लग गई है’ मालिक प्यार से बिस्कुट चबाते हुये लापरवाही से कहता है, ‘मुझे क्या?’ वह व्यक्ति स्पष्ट
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एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह गया भेद मजधार और किनारों का,डूब गया अन्तर रोशनी के सैलाब में,सूरज और तारों का। आभासित होती रही बस तुम, केवल तुम!देह की सीमाएँ सब खो गयी,तुम से क्या मिली असीम हो गयी। मन की व्यथाएँ आनंद के पारावार मेंडूबने उतराने लगी,चारों तरफ तुम्हारी छवि
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सच बोलें तो दुनिया रूठे, झूठ कहें तो राम,सतपथ के अनुगामी का यहाँ जीना हुआ हराम। सच बोलें तो दुनिया कहती यह अनपढ़, पागल है,झूठ कहें तो दिल कहता है यह तो राम से छल है। एक तरफ हम झूठ रखें और एक तरफ ईश्वर को मानें,कैसा अजब तमाशा है यह, एक तीर से कई
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माना कि जीवन जटिल रहस्यों की गुत्थी है, कभी कठिन तो कभी सरल, लेकिन कल्पना मात्र के लिए इसे दूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए क्या अब किसी भी युवा में परित्याग करने की हिम्मत नहीं रह गयी हैै जो कि वह निरन्तर नशे की गिरफ्त में समाती जा रही है। आज जिस तरह
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