एक लड़की की लिखी कविता
- कविता/ग़ज़ल
- August 31, 2026

‘प्रत्यक्ष देवता सूर्यः जगच्चक्षुः दिवाकरः’सूर्य-ब्रह्माण्ड गोलक का अधिपति है। पृथ्वी का सौरमण्डल सूर्य द्वारा ही संचालित व नियंत्रित है। जितने भी ग्रह, नक्षत्र, योग, राशियां, करण, आदित्यगण, वसुगण, रुद्र, अश्विनी कुमार, वायु, अग्नि, शक्र प्रजापति, समस्त भूः भुवः स्वः आदि लोक सम्पूर्ण नभ, नाग, नदियां, समुद्र और समस्त भूतों का समुदाय हैं। इन सभी के
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मंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल है। एक बार मंगल की मातोस्वरी पृथ्वी, भगवान विष्णु पर सुप्त हो गई थी और लावण्यवती तरुणी का रूप धारण करके विष्णु के गले उपस्थित हुई। विष्णु ने उसका श्रृंगार किया, किन्तु तब वह मातोस्वरी पृथ्वी कामातुर होकर बेहोश हो गई थी, ऐसी विषम स्थिति
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राष्टंपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और बिना ग्राम्य विकास के समृद्ध भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। इसीलिए उन्होंने पंचायती राज के माध्यम से ग्राम्य विकास की परिकल्पना की थी और उनके विचारों का सम्मान करते हुए हमारे संविधान-निर्माताओं ने पंचायती राज का प्रावधान किया। ग्रामीण
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धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष इस पुरुषार्थ चतुष्ठय की सिद्धि के लिए सर्वप्रथम शरीर का स्वस्थ एवं निरोग रहना नितान्त आवश्यक है। रोगों से आक्रान्त शरीर के द्वारा कोई भी पुरुषार्थ सिद्ध नहीं किया जा सकता यह सर्वथा सत्य है। अभिप्राय यह है कि स्वस्थ शरीर के द्वारा ही धर्म-कर्मों का अनुष्ठान किया जा सकता
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