कहीं थू-थू की रैली है, कहीं धिक्कार की रैली,कहीं त्रिशूल दिखाते हैं, कहीं तलवार की रैली।सियासत में प्रदूषण है, विचार गंगा ही मैली है,चलो पटना में पिटने को वहां लाठी की रैली है। क्या पता क्या रूप देते हैं वे इस रैली की शैली को,कोई जूतामार रैली हो या खुली कीचड़ की थैली हो।कब सुधरेंगे

कहीं थू-थू की रैली है, कहीं धिक्कार की रैली,
कहीं त्रिशूल दिखाते हैं, कहीं तलवार की रैली।
सियासत में प्रदूषण है, विचार गंगा ही मैली है,
चलो पटना में पिटने को वहां लाठी की रैली है।
क्या पता क्या रूप देते हैं वे इस रैली की शैली को,
कोई जूतामार रैली हो या खुली कीचड़ की थैली हो।
कब सुधरेंगे ये नेता इन्हें कब अक्ल आएगी,
चलें सद्भाव के पथ पर निकालें प्रगति की रैली।
नहीं तो आएगा इक दिन, इन्हें जनता रुलाएगी,
बुरी गत होगी इनकी जब निकलेगी दुर्गति की रैली।










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