सामग्री- विधि- हरी चटनी- पोषक मूल्य- मंडुवे की रोटी में निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं।

सामग्री-
- मंडुवे का आटा – 150 ग्रा0
- नमक – 1/4 चम्मच
- घी – 2 चम्मच
विधि-
- सर्वप्रथम मंडुवे के आटे को नमक डालकर गूंथ लेते हैं।
- मंडुवे के आटे की छोटी लोई बनाकर उसे रोटी के आकार का बेल लेते हैं।
- इस रोटी को घी लगाकर हरी धनिया चटनी व गुड के साथ परोसा जाता है, यह उत्तराखंण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में नाश्ते में बनने वाला मुख्य व्यंजन है।
हरी चटनी-
- धनिया – 250 ग्रा0
- जीरा – 1 चम्मच
- टमाटर – 1
- लहसुन – 5 फली
- अदरक – 10 ग्रा0
- नमक, मिर्च – स्वादानुसार
विधि- सभी सामग्री को एक साथ सिल में पीसकर एक पेस्ट तैयार कर लिया जाता है। जिसमें स्वादानुसार नमक, मिर्च डाला जाता है। ‘इसमें टमाटर को भूनकर भी प्रयोग किया जा सकता है।
पोषक मूल्य- मंडुवे की रोटी में निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं।
- कैल्शियम- मंडुवे की रोटी में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इस कारण वर्तमान में जापान ने उत्तखण्ड़ सरकार से ढ़ाई सौ कुन्तल मंडुवे की मांग की है जिसका प्रयोग मंडुवा बेबी फूड्स बनाने में किया जाएगा। वर्तमान में सरकार ने जापानी विशेषज्ञों के सहयोग से मंडुवे द्वारा बेबी फूड्स बनाने की तैयारी की है, इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी, मंडुवे में कैल्शियम की अधिकता होती है इस कारण यदि इसे उपयुक्त बाजार मिल जाता है तो ग्रामीण महिलाएं इसका उपयोग नकदी फसल के रूप में कर सकती है व मंडुवे की खेती से प्रोत्साहन मिलेगा।
- आयरन- इसमें आयरन की भी पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।
- कार्बोहाइड्रेट- मंडुवे में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।
- वसा- इस रोटी को मुख्य रुप से घी के साथ खाया जाता है, इस कारण पौष्टिकता और अधिक बढ़ जाती है।
- रफेज- इस रोटी को मुख्य रुप से गेहूं व मंडुवे से बनाया जाता है जिसमें चोकर होने के कारण रफेज की मात्रा बढ़ जाती है।
- विटामिन- मंडुवे व घी में कुछ अंश विटामिन का भी पाया जाता है।
- जल- हमारे शरीर में पानी का कुछ अंश रोटी से भी जाता है क्योंकि आटा गूंथने में पानी की आवश्यकता पड़ती है।










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