जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,फुलण बैठी सब्बी पार्टि्यूं क खुला हाथ।सब्बी भाग-भागिक नि थकणा छन,अपण-अपण दांव लगाणा छन। छ्वीट जात्यिूं कु त वो ह्वे गै भगवान,अर गरीब थै भी अपण बताणा छन।पोरु साल ‘जल प्रलय’ माँ जो ह्वे छौ उजाड़-बिजाड़,बौगिगी छुट्टिगीं गांव, गुठ्यार, सब्यूं मां टूटी दुख कु पहाड़। नेतोंन हैलीकॉप्टर मां रेस

जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,
फुलण बैठी सब्बी पार्टि्यूं क खुला हाथ।
सब्बी भाग-भागिक नि थकणा छन,
अपण-अपण दांव लगाणा छन।
छ्वीट जात्यिूं कु त वो ह्वे गै भगवान,
अर गरीब थै भी अपण बताणा छन।
पोरु साल ‘जल प्रलय’ माँ जो ह्वे छौ उजाड़-बिजाड़,
बौगिगी छुट्टिगीं गांव, गुठ्यार, सब्यूं मां टूटी दुख कु पहाड़।
नेतोंन हैलीकॉप्टर मां रेस लगै-लगै कि मारी दहाड़,
कि हम सब छां तुम्हर दगड़ि पर तुम नी छ्वड्यां अपरु पहाड़।
पर अब भी सब उन्नी च उजाड़-बिजाड़ ‘जन्नी का तन्नी’,
अर सब्बी उड़दरा, बुथ्यंदरा काटि गीं कन्नी।









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