जिस प्रकार कोई भी जीव पानी व हवा के बगैर जीवित नहीं रह सकता, उसी प्रकार मानव जीवन में योग्य डॉक्टर व सही दवाइयों की भी अहम भूमिका होती है। लेकिन भौतिकवाद के इस युग में अधिक से अधिक कमाने की होड़ ने इन दोनों को भी अपने वशीभूत कर लिया है और आजकल मेडिकल

जिस प्रकार कोई भी जीव पानी व हवा के बगैर जीवित नहीं रह सकता, उसी प्रकार मानव जीवन में योग्य डॉक्टर व सही दवाइयों की भी अहम भूमिका होती है। लेकिन भौतिकवाद के इस युग में अधिक से अधिक कमाने की होड़ ने इन दोनों को भी अपने वशीभूत कर लिया है और आजकल मेडिकल स्टोरों व झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या में जिस तेजी से अनन्त वृद्धि हो रही है, वह निस्संदेह गंभीर ही नहीं बल्कि बेहद खतरनाक है। क्योंकि आज दुनिया में नकली, अल्कोहलिक व अधोमानक दवाओं का कारोबार इस प्रकार तेजी से बढ़ रहा है कि अब जीवन रक्षक दवाएं भी ‘दवाओं के सौदागरों’ के चंगुल से नहीं बची हैं। इन दवा निर्माताओं व विक्रेताओं से इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि प्रतिवर्ष नकली दवाओं के सेवन से कितने लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। यही नहीं आजकल हमारे देश में भी डॉक्टरों की सलाह के बिना व लिखित पर्चे के बगैर अल्कोहलिक (नशीली) दवाओं की बिक्री का कारोबार भी धड़ल्ले से चल रहा है। मेडिकल स्टोरों में आसानी से अल्कोहलिक दवाएं मिलने के कारण युवा युवाओं में नशे की लत दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है वहीं मेडिकल स्टोर नशे की चाय काट रहे हैं।
उत्तराखण्ड राज्य में जिस तेजी से मेडिकल स्टोरों व झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है उसने भी हमारे समाज के समक्ष यह प्रश्न अवश्य उत्पन्न करके रख दिया है कि क्या वास्तव में हमारे यहाँ मरीजों की संख्या में इस तेजी से बढ़ोतरी हो रही है? या यह व्यवसाय इतनी मोटी कमाई का जरिया बन गया है कि लोग अपने पुराने धंधे को छोड़कर इसमें अपना रहे हैं। हमें इस महत्वपूर्ण प्रश्न और समस्या का हल खोजना ही होगा। वैसे कुछ सत्य यह है कि भौतिकवाद की चकाचौंध के चलते हमारे पास बच्चों को सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं देने के लिये समुचित धन है परन्तु उचित मार्ग दर्शन हेतु समय नहीं। यही वजह है कि भरपूर पैसे व ऐशोआराम ने युवा पीढ़ी को बुरी लत की ओर आकर्षित किया हुआ है। यह कहना गलत न होगा कि मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाने वाली विभिन्न प्रकार की अल्कोहलिक दवाओं ने युवाओं को इस कदर अपने गिरफ्त में ले लिया है कि वे आसानी से इनसे छुटकारा नहीं पा सकते।
शासन-प्रशासन को निरंतर बढ़ते मेडिकल स्टोरों, नकली दवाइयों व झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या की ओर ठोस कदम उठाना होगा वहीं माता-पिता को भी अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए इन युवाओं के उचित मार्गदर्शन के लिये समय निकालना होगा। क्योंकि बिना उचित मार्गदर्शन व पारिवारिक संस्कारों से इन्हें भटकने से नहीं रोका जा सकता।














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