• सलाम लोकतंत्र

    सलाम लोकतंत्र0

    नहीं फरक अब गांव शहर में दोनों का है बुरा हाल दरियादिल की बात नहीं अब गांव हुए कंगाल घर-घर हिंसा तू तू मैं मैं घृणा नफरत का छाता जाल मदिरा की तो बात न पूछो मन्दिर का भी नहीं ख्याल! हरियाली और तीज त्योहारों की अब नहीं बहार सावन रूठा, झूला भूले! गीतों का

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