
‘लकीर-पिटेणी’ मात्र कहानी का ही शीर्षक नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का उद्गार भी है, जो अपने समय का महान कर्मकाण्डी और ज्योतिषी था। बात बहुत पुरानी है। तब मैं एक “मिडिल स्कूल” में अध्यापक था। वेतन में मास्टरी मिली थी। तब मैं स्कूल में ही रहता था। रहना-बसना, खाना-पीना, सब स्कूल के एक कमरे
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