सच बोलें तो दुनिया रूठे, झूठ कहें तो राम,सतपथ के अनुगामी का यहाँ जीना हुआ हराम। सच बोलें तो दुनिया कहती यह अनपढ़, पागल है,झूठ कहें तो दिल कहता है यह तो राम से छल है। एक तरफ हम झूठ रखें और एक तरफ ईश्वर को मानें,कैसा अजब तमाशा है यह, एक तीर से कई
सच बोलें तो दुनिया रूठे, झूठ कहें तो राम,
सतपथ के अनुगामी का यहाँ जीना हुआ हराम।
सच बोलें तो दुनिया कहती यह अनपढ़, पागल है,
झूठ कहें तो दिल कहता है यह तो राम से छल है।
एक तरफ हम झूठ रखें और एक तरफ ईश्वर को मानें,
कैसा अजब तमाशा है यह, एक तीर से कई निशाने।
देख रहे हैं झूठ दिनों-दिन मौजें मना रहा है,
सच का सेवक कदम-कदम पर आँसू बहा रहा है।
उम्र गुजर गयी राह देखते माया मिली न राम,
झूठ बनाया लक्ष्य जिन्होंने पल में हुए महान।
कैसी अनुपम लीला है प्रभु कैसी अग्नि परीक्षा,
सच का मन भी डोल रहा अब कष्ट हरो जगदीशा।
लोग अन्यथा खुलकर तुमको, झूठ लगे हैं कहने,
तेरे सेवक बीच भंवर में लगे पड़े हैं रोने।
पथ में हारे मीत मेरे तुम कभी न हिम्मत हारो,
परमेश्वर तो अटल सत्य है सत्य कभी न बिसारो।
सच के ऊपर ही यह धरती अब तक टिकी हुई है,
झूठे को भी अपनी ख्यातिर सच की पड़ी हुई है।
बेशक तुमने सच के पथ पर अपना जीवन गंवा दिया,
पर मानवता के मूल्यों को है, तुम जैसे ने प्राण दिया।
ईश्वर तुमसे भी विनती है, सच को नहीं रुलाओ,
इसी जन्म में करनी फल दो, ऐसी नीति बनाओ।।
















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