आधाशीशी (MIGRAINE): कारण एवं चिकित्सा

आधाशीशी (MIGRAINE): कारण एवं चिकित्सा

वर्तमान समय में जबकि मनुष्य भौतिकवाद की अन्धी दौड़ में बिना लक्ष्य के भटक रहा है, ऐसे में मनुष्य का मानसिक तनाव से ग्रसित होना एक आम बात हो गई है। ऐसे माहौल में तेजी से बढ़ता हुआ आधाशीशी (MIGRAINE) अत्यन्त दुखदाई रोग है। आयुर्वेद के अनुसार हवा भोजन करने से, अर्धपाचन (भोजन के ऊपर

वर्तमान समय में जबकि मनुष्य भौतिकवाद की अन्धी दौड़ में बिना लक्ष्य के भटक रहा है, ऐसे में मनुष्य का मानसिक तनाव से ग्रसित होना एक आम बात हो गई है। ऐसे माहौल में तेजी से बढ़ता हुआ आधाशीशी (MIGRAINE) अत्यन्त दुखदाई रोग है। आयुर्वेद के अनुसार हवा भोजन करने से, अर्धपाचन (भोजन के ऊपर भोजन) करने से, बर्फ, दही आदि शीतल पदार्थों के सेवन से, मल-मूत्र के वेगों को रोकने से, ज्यादा पैदल चलने से, बिना पौष्टिक भोजन के अत्यधिक व्यायाम करने से एवं अत्यधिक सहवास से इस रोग की उत्पत्ति होती है। इन कारणों के अतिरिक्त पानी कम पीने से, कष्टप्रद बस की यात्रा करने पर, समय पर भोजन न करने पर पूरी नींद न लेने से वंशानुक्रम एवं खासकर स्त्रियों में मासिक धर्म की गड़बड़ी से भी यह रोग होता है। जो लोग मजदूरी एवं खेती-बाड़ी का कार्य करते हैं उनमें यह रोग कम होता है। जो लोग ज्यादा लेखन कार्य करते हैं उनमें तथा बुद्धिजीवियों में यह रोग अधिक पाया जाता है।

यह रोग वायुप्रधान है कभी-कभी वायु एवं कफ प्रदूषित होने से भी यह रोग होता है। करीब 25 प्रतिशत यह रोग त्रिदोषज (वात, पित्त, कफ) के कारण होता है। दोषों की जानकारी होने पर इस रोग की चिकित्सा आसानी से की जा सकती है। यदि रोगी को उल्टी आ जाए तथा 2-3 घंटे रोगी सो जाए तो यह रोग तत्काल शान्त हो जाता है।

सबसे पहले रोग किस कारण से हुआ रोगी को पूछकर जानकारी लेनी चाहिये। जिस कारण (MIGRAINE) हुआ है उसे दूर करना जरूरी होता है। कई लोगों को दोपहर के भोजन में देरी होने से या भोजन बहुत जल्दी कर लेने पर (MIGRAINE) की शिकायत हो जाती है तथा कुछ लोगों में खासकर महिलाओं में भीड़ भरी बसों में यात्रा करने पर यह रोग हो जाता है। इसलिए पहले मूल कारण को दूर करना आवश्यक है।

वैद्य या डॉक्टर को रोगी को उपचार करने से पहले, स्त्री हो या पुरुष, पेट साफ करने की हल्की दवा देनी चाहिये। जिस दिन पेट साफ करने की दवा दी जाए उस दिन दोपहर एवं रात्रि के भोजन में केवल मूंग की खिचड़ी गाय के घी के साथ एवं मीठी दही के साथ लेनी चाहिये। खिचड़ी में 10 से 20 ग्राम तक घी लिया जा सकता है। फिर उस दिन रात को सोते समय स्वाडिष्ट विरेचन चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में 5 ग्राम ईसबगोल चूर्ण के साथ देना चाहिये। इससे रोगी को 1-2 दस्त हो सकते हैं। इस चूर्ण को दो गिलास गर्म पानी से ही लेना चाहिये। दूध या ठण्डे पानी से कब्ज की दवा कभी नहीं लेनी चाहिये, कारण इससे पेट भली भांति साफ नहीं हो पाता है।

जब रोगी को दो-तीन दस्त हो जाए तो अगले दिन से रोगी को दवा प्रारम्भ करनी चाहिये। दस्त वाले दिन भी भोजन में खिचड़ी ही लेनी चाहिये। थोड़ा-थोड़ा पानी रोगी को कई बार पीना चाहिये। आयुर्वेद में इस रोग की दवा सिर्फ पथ्यादिव्रत है। यह क्वाथ बाजार में बना-बनाया भी मिल जाता है। अगर कोई इसे बनाना चाहे तो इसका नुस्खा इस प्रकार है-

हरड़+बहेड़ा+आंवला+चिरायता+हल्दी+नीम की छाल+गिलोय इन सब औषधियों को बराबर मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें। नीम की छाल एवं गिलोय यदि ताजा मिल जाए तो काढ़ा ज्यादा असरदार बन जाता है। 15 ग्राम इस चूर्ण को 200 ग्राम पानी में उबालना चाहिये। 50 ग्राम पानी शेष रहने पर इसे मसलकर छान लें। छानने के बाद इस काढ़े में 10 ग्राम गुड़ या चीनी तथा 5 ग्राम काला नमक मिला लें। काढ़ा बनाते समय बर्तन को ढकना नहीं चाहिये। इस काढ़े को प्रातः खाली पेट तथा रात्रि को सोते समय लेना चाहिये। काढ़ा लेने के करीब आधा घंटा आराम करना चाहिये। यदि रोगी को काढ़ा लेते ही उल्टी आ जाए तो यह अच्छा लक्षण है। इससे रोगी का सिरदर्द उसी वक्त ठीक हो जायेगा। यह क्वाथ शिरोरोग, कर्णपट्टी का दर्द, सूर्यवर्त दन्तशूल, नेत्ररोग, नेत्रशूल तथा कान संबंधी रोगों में भी लाभदायक होता है। साथ गए या नया सिरदर्द केवल एक सप्ताह या दस दिन दवा लेने पर ठीक हो जाता है। पुराने रोगों में कम से कम 20 दिन पथ्यादि क्वाथ रोगी को देना चाहिये। इस क्वाथ के सभी घटक शरीर के लिये उपयोगी एवं रसायन का कार्य करते हैं।

यदि रोगी सूर्यवर्त से पीड़ित हो (इससे सूर्य उगने के साथ सिर में दर्द बढ़ता है और दोपहर को तीव्र होकर अपराह्न या शाम तक शान्त होता है) तो उसे सुबह जल्दी 3-4 बजे उठकर 2-4 रत्ती कर्पूर भस्म (पीली कैरो भस्म) एक ग्राम गुड़ के हलवे या पेड़े के साथ देनी चाहिये। इससे जीभ फट जाती है। यदि सिरदर्द के साथ रोगी को जुकाम की भी शिकायत हो, पुराना भय रोग हो तो सीतोपलादि चूर्ण के साथ गोदन्ती भस्म और सब गिलोय चूर्णानुपान या शहद के साथ सुबह-शाम चाटना चाहिये। भोजन के बाद अदरकिस्ट तथा अश्वगंधारिष्ट थोड़ा पानी मिलाकर पियें। महिलाओं में सिरदर्द की शिकायत प्रायः महवारी की गड़बड़ी से रहती है। महीना साफ नहीं आता है इसमें रजः प्रवर्तिनी वटी सेवनम अधिक है। महीना आने की तिथि से पांच दिन पूर्व 1-1 या 2-2 वटी गर्म जल से लें। कभी-कभी श्वेत प्रदर के कारण से भी (MIGRAINE) हो जाता है। ऐसे में ल्युकोरिया की औषधि भी लें। कभी-कभी आंखों की कमजोरी के कारण तथा खराबी से भी इसका संबंध होता है। ऐसी स्थिति में नेत्र विशेषज्ञ से नेत्रों की जांच करानी भी आवश्यक होती है। इसलिए अगर इस रोग से बचना है तो सभी को मिथ्या आहार-विहार से बचते हुए मानसिक तनावों से दूर रहना चाहिये।

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