मानव जन्म हीरे-सा अनमोल है, जिसे स्थायी व्यक्ति भौतिक प्रगति की सीढ़ियाँ चढ़ने में व्यर्थ गंवाता है। इसे तलाश कर चमकाने का काम गुरु ही कर सकता है। ऐसे ही नहीं संत कबीर गुरु को भी गोविन्द से बड़ा बताये गये हैं। ईश्वर की कृपा से आज हमारे भाग्य में गुरु रूपी धरोहर मिलते हैं।
मानव जन्म हीरे-सा अनमोल है, जिसे स्थायी व्यक्ति भौतिक प्रगति की सीढ़ियाँ चढ़ने में व्यर्थ गंवाता है। इसे तलाश कर चमकाने का काम गुरु ही कर सकता है। ऐसे ही नहीं संत कबीर गुरु को भी गोविन्द से बड़ा बताये गये हैं।
ईश्वर की कृपा से आज हमारे भाग्य में गुरु रूपी धरोहर मिलते हैं। किसी के चाहने भर से ये अनमोल आभूषण सामने नहीं उभरेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि आप सच्चे हृदय से किसी गुरु की शरण में जाते हैं तो वह आपको इस असार-संसार से तार कर ही दम लेगा। आपके ज्ञान चक्षु ऐसे खुलेंगे कि हर माया मोहिन (धरोहर) से दूर जा कर आप गुरु के माया मोह से बंध जायेंगे।
गुरु अपनी अमूल्य दीक्षा के बदले आपसे कुछ नहीं बस आपका थोड़ा-सा ध्येय व पूर्ण समर्पण (तन-मन-धन जो आपके पास जितना है) इस निःलित भाव से चाहते हैं जैसे वह आपका ही है। अब तक जो था वह बोझ था, जिसे उतार कर अब आप फूल से हल्के-फुल्के हैं।
मूढ़ और महामापी हैं वे, जो अकारण गुरुओं पर कटाक्ष करते हैं। उनके मुखारबिन्दों से निकले वाक्यों के वास्तविक मर्म न समझ कर उन्हें विवादों में घसीटते हैं और तोड़-मरोड़ कर तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए अर्थ का अनर्थ बना देते हैं।
दिल्ली गैरोप दुर्घटना पर हमारे संतों-गुरुओं की प्रतिक्रियाओं का सीधा संकेत यही है कि यह उन संतों (न कि इडिया) पर ही चोट है। पूरा देश उनकी शरण में आकर उनसे दीक्षा ले ले तो समाज में न अपराध रहेगा न अपराधी।
जरा सोचिये ऐसी सद्भावना रखने वाले गुरुओं को हाथ जोड़ नमन कर उनकी शरण में चले जाना क्या हमारे हित में नहीं है। तो चलिये हम-आप सारे काम धन्धे छोड़कर इनकी छत्रछाया में बैठ जायें और सारे संसार की ओर से आँखें मूँदकर ध्यान में डूब जायें।














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