अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते-भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी तरह इस घर से उस घर में जाकर गृहस्वामिनी से पूजे जाते। फिर हलवा-पूरी की दावतें उड़ाते और दक्षिणा के पैसे बार-बार गिनकर प्रसन्न होते, पर हम तो गिनती में बहुत होती
अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते-भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी तरह इस घर से उस घर में जाकर गृहस्वामिनी से पूजे जाते। फिर हलवा-पूरी की दावतें उड़ाते और दक्षिणा के पैसे बार-बार गिनकर प्रसन्न होते, पर हम तो गिनती में बहुत होती थीं। कन्या-पूजा के लिए कभी हमारा तोड़ा नहीं पड़ता था और अब… बमुश्किल मिलती हैं छोटी बच्चियां। ऐसे में एक राह यही बचती है कि किसी तरह इन्हें एकत्र करो और इन्हीं को दो-दो, तीन-तीन बार पूजा कर अष्टमी पूजा पूरी हुई समझो।
हमारे समाज में स्त्री को पूजने और सम्मान देने का यह अच्छा तरीका है। पहले तो उसे इस दुष्ट दुनिया में लाने का प्रयास ही न करो यानी भ्रूण हत्या। जो इस कृत्य से बच गईं, उन्हें कन्या-पूजा के दिन बढ़िया-बढ़िया खिलाओ। बाकी दिन जैसे भी पालो-पोषो, किसी तरह उन्हें पढ़ाओ, क्योंकि अब विवाह के लिए पढ़ाई अनिवार्य हो गई है। पढ़ाई के बाद उनका विवाह कर दो और दहेज की वेदी पर उसके बलिदान होने की प्रतीक्षा करो। भाग्य से वे बच गईं तो घर-बाहर हर जगह भूखे भेड़िये उसे निवाला बनाने को छिपे बैठे हैं।
हमारे देश में लिंग-भेद क्यों है! क्यों स्त्री को पुरुष से कमतर समझा जाता है। इस संदर्भ में हम पश्चिमी देशों से क्यों नहीं सीख सकते। विदेशों में गर्भावस्था के दौरान लिंग परीक्षण गैर-कानूनी नहीं है। क्यों वहां इसकी आवश्यकता नहीं है? वे इस बात को हजम कर ही नहीं सकते कि कन्या भ्रूण की हत्या की जाये। वहां डॉक्टर माता-पिता को सहज रूप से बता देते हैं कि उनके यहां कौन सी सन्तान जन्म लेने वाली है— लड़का या लड़की। हम कब इतने विशाल दृष्टिकोण वाले बनेंगे कि अपनी सन्तान की जांच करा कर उसे कोख में मारने की अपेक्षा खुशी-खुशी उसे स्वीकार करेंगे। बालक-बालिका को एक समान व्यवहार के साथ पालेंगे और दोनों को समान शिक्षा प्रदान करेंगे।
यदि पूरे देश में यह स्थिति नहीं बनती तो लिंगानुपात में भयानक अन्तर न होता और इससे फिर समाज में जो खतरनाक स्थितियां बनेंगी, उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कन्या-धन की कमी समाज में हर प्रकार की निर्धनता लेकर आयेगी, इसमें सन्देह नहीं है।














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