एक लड़की की लिखी कविता
- कविता/ग़ज़ल
- August 31, 2026

अनपढ़ गंवार थे वो सन्त कबीराजो कहे माया बड़ी ठगनि हम जानीदौलत तेरी बस एक लंगोटी अरे फकीरा,देखा तूने बन्द कमरों में हीरे मोतियों का जखीरा,देखी तूने कभी बेशकीमती बी.एम.डब्लू गाड़ी,जिसमें शान से बैठे हों धनपति राजा कलमाड़ी,झूठ, फरेब, ठगी से इतनी माया जोड़ी,शपथ बद्धता हमने कब तोड़ी,शपथ तो हमनें यह थी खाई,वक्त मिला है
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