
अच्छी भली हंसती-खेलती गृहस्थी थी अनिल की। माँ, पत्नी, दो बच्चे- एक लड़की एक लड़का। माँ कभी उसके पास रहती, कभी बड़े बेटे के पास मुंबई और बीच-बीच में पहाड़ अपने गांव का चक्कर लगा जाती, वहाँ किसी को आधे पर खेत दिये थे, उनका हिसाब-हिताब देखने। स्वयं अनिल एवं प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता
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