एक लड़की की लिखी कविता
- कविता/ग़ज़ल
- August 31, 2026

जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,फुलण बैठी सब्बी पार्टि्यूं क खुला हाथ।सब्बी भाग-भागिक नि थकणा छन,अपण-अपण दांव लगाणा छन। छ्वीट जात्यिूं कु त वो ह्वे गै भगवान,अर गरीब थै भी अपण बताणा छन।पोरु साल ‘जल प्रलय’ माँ जो ह्वे छौ उजाड़-बिजाड़,बौगिगी छुट्टिगीं गांव, गुठ्यार, सब्यूं मां टूटी दुख कु पहाड़। नेतोंन हैलीकॉप्टर मां रेस
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