एक लड़की की लिखी कविता
- कविता/ग़ज़ल
- August 31, 2026

धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष इस पुरुषार्थ चतुष्ठय की सिद्धि के लिए सर्वप्रथम शरीर का स्वस्थ एवं निरोग रहना नितान्त आवश्यक है। रोगों से आक्रान्त शरीर के द्वारा कोई भी पुरुषार्थ सिद्ध नहीं किया जा सकता यह सर्वथा सत्य है। अभिप्राय यह है कि स्वस्थ शरीर के द्वारा ही धर्म-कर्मों का अनुष्ठान किया जा सकता
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वर्तमान समय में जबकि मनुष्य भौतिकवाद की अन्धी दौड़ में बिना लक्ष्य के भटक रहा है, ऐसे में मनुष्य का मानसिक तनाव से ग्रसित होना एक आम बात हो गई है। ऐसे माहौल में तेजी से बढ़ता हुआ आधाशीशी (MIGRAINE) अत्यन्त दुखदाई रोग है। आयुर्वेद के अनुसार हवा भोजन करने से, अर्धपाचन (भोजन के ऊपर
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