• उगदु सूरज

    उगदु सूरज0

    औंसि कि कालि रात वितद ही सुबेर कु सूरज फिर उगि औंद। वैकि सुनहरि किरण, हर एक क मुख पर एक चमक अर नयु उत्साह दे जौंद। तबि सब जीव फिर अपंण-अपंण काम पर जुटि जदीं। गौंकि बिन्द्रा कू जीवन बि अब तक, कै कालि रात से कम नि रै। माँ बाबु की इकलौति संतान

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